अपना ही रंग मोहे
Karaoke :
अपना ही रंग मोहे रंग दो प्रभुजी,
आतम का रंग मोहे रंग दो प्रभुजी ।
रंग दो रंग दो रंग दो प्रभुजी ॥
ज्ञान में मोह की धूल लगी है,
धूल लगी है प्रभु धूल लगी है ।
इससे मुझको छुड़ा दो प्रभुजी ॥1॥
सच्ची श्रद्धा रंग अनुपम,
रंग अनुपम प्रभु रंग अनुपम ।
इससे मोकों सजा दो प्रभुजी ॥2॥
रत्नत्रय रंग तुमरा सरीखा,
तुमरा सरीखा, तुमरा सरीखा ।
इससे मोकों सजा दो प्रभुजी ॥3॥
सेवक शरण गही जिनवर की,
सेवक शरण गही आतम की ।
जनम-मरण दु:ख मिटा दो प्रभुजी ॥4॥