तिहारे ध्यान की मूरत
Karaoke :
तर्ज : बहारों फूल बरसाओ मेरा
तिहारे ध्यान की मूरत, अजब छवि को दिखाती है ।
विषय की वासना तज कर, निजातम लौ लगाती है ॥टेक॥
तेरे दर्शन से हे स्वामी! लखा है रूप मैं तेरा ।
तजूँ कब राग तन-धन का, ये सब मेरे विजाती हैं ॥१॥
जगत के देव सब देखे, कोई रागी कोई द्वेषी ।
किसी के हाथ आयुध है, किसी को नार भाती है ॥२॥
जगत के देव हठग्राही, कुनय के पक्षपाती हैं ।
तू ही सुनय का है वेत्ता, वचन तेरे अघाती हैं ॥३॥
मुझे कुछ चाह नहीं जग की, यही है चाह स्वामी जी ।
जपूँ तुम नाम की माला, जो मेरे काम आती है ॥४॥
तुम्हारी छवि निरख स्वामी, निजातम लौ लगी मेरे ।
यही लौ पार कर देगी, जो भक्तों को सुहाती है ॥५॥