तेरी शांत छवि
Karaoke :
तर्ज : मोहोब्बत की झूठी
तेरी शांति छवि पे मैं बलि बलि जाऊँ ।
खुले नैन मारग, आ दिल मैं बिठाऊँ ॥
लेखा ना देखा, धर्म पाप जोड़ा,
बना भोग लिप्सा कि चाहों में दौड़ा,
सहे दुख जो जो कहा लो सुनाऊँ ।
तेरी शांति छवि पे मैं बलि बलि जाऊँ ॥1॥
तेरा ज्ञान गौरव जो गणधर ने गाया,
वही गीत पावन मुझे आज भाया,
उसी के सुरों में सुनो मैं सुनाऊँ ।
तेरी शांति छवि पे मैं बलि बलि जाऊँ ॥2॥
जगी आत्म ज्योति सम्यक्त्व तत्त्व की,
घटी है घटा शाम मिथ्या विकल की,
निजानन्द 'सौभाग्य' सेहरा सजाऊँ ।
तेरी शांति छवि पे मैं बलि बलि जाऊँ ॥3॥