नेमिप्रभू की श्यामवरन
Karaoke :
तर्ज : जिनमंदिर में आके हम
नेमिप्रभू की श्यामवरन छवि, नैनन छाय रही ।
मणिमय तीन पीठ पर अंबुज, तापर अधर ठही ॥टेक॥
मार मार तप धार जार विधि, केवलऋद्धि लही ।
चारतीस अतिशय दुतिमंडित, नवदुगदोष नही ॥१॥
जाहि सुरासुर नमत सतत, मस्तकतैं परस मही ।
सुरगुरुवर अम्बुजप्रफुलावन, अद्भुत भान सही ॥२॥
घर अनुराग विलोकत जाको, दुरित नसै सब ही ।
'दौलत' महिमा अतुल जासकी, कापै जात कही ॥3॥