जय जिन वासुपूज्य
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तर्ज : देखो जी आदीश्वर स्वामी
जय जिन वासुपूज्य शिव-रमनी-रमन मदन-दनु-दारन हैं ।
बालकाल संयम सम्हाल रिपु, मोहव्याल बलमारन हैं ॥
जाके पंचकल्यान भये चंपापुर में सुखकारन हैं ।
वासववृंद अमंद मोद धर, किये भवोदधि तारन हैं ॥१॥
जाकै वैन सुधा त्रिभुवन जन, को भ्रमरोग विदारन हैं ।
जा गुनचिंतन अमलअनल मृत, जनम-जरा-वन-जारन हैं ॥२॥
जाकी अरुन शांतछवि-रविभा, दिवस प्रबोध प्रसारन हैं ।
जाके चरन शरन सुरतरु वांछित शिवफल विस्तारन हैं ॥३॥
जाको शासन सेवत मुनि जे, चारज्ञान के धारन हैं ।
इन्द्र-फणींद्र-मुकुटमणि-दुतिजल, जापद कलिल पखारन हैं ॥४॥
जाकी सेव अछेवरमाकर, चहुंगतिविपति उधारन हैं ।
जा अनुभवघनसार सु आकुल, तापकलाप निवारन हैं ॥५॥
द्वादशमों जिनचन्द्र जास वर, जस उजासको पार न हैं ।
भक्तिभारतें नमें 'दौल' के, चिर-विभाव-दुख टारन हैं ॥६॥