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श्री
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आत्मा_ही_समयसार
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आत्मा ही समयसार, म्हाने जिनवाणी सिखलइयो-²।
म्हाने जिनवाणी सिखलइयो, कर्मन को तुम खिरवइयो।।
आत्मा ही समयसार, म्हाने जिनवाणी सिखलइयो ।।टेकडं

तुम सम्मेदाचल जइयो, अरु सिद्ध शिला बतलइयो-²
करवइयो - ३ भेद-विज्ञान, म्हाने जिनवाणी सिखलइयो ।
जिनवाणी सिखलइयो, प्रवचन में लेकर जइयो ।।
आत्मा ही - ३… ॥१॥

तुम गिरनारी जी जइयो, दशलक्षण पर्व मनइयो-²
बतलइयो - ३ धर्म महान, म्हाने जिनवाणी सिखलइयो ।
जिनवाणी सिखलइयो, सिद्धशिला लेजइयो ।।
आत्मा ही - ३… ॥२॥

तुम अष्टापद जी जइयो, आतम अनात्म समझइयो-²
दर्शइयो - ३ सृष्टि-विधान, म्हाने जिनवाणी सिखलइयो ।
जिनवाणी सिखलइयो, तुम आतम ध्यान लगइयो ।।
आत्मा ही - ३… ॥३॥

तुम श्री चम्पापुर जइयो, कल्याणक पाँच मनइयो-²
बतलइयो - ३ केवल ज्ञान, म्हाने जिनवाणी सिखलइयो ।
जिनवाणी सिखलइयो, दुखद कर्मों से बचइयो ।।
आत्मा ही - ३…॥४॥


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