भवदधि तारक नवका जगमाहीं
Karaoke :
भवदधि-तारक नवका जगमाहीं जिनवान ॥टेक॥
नय प्रमान पतवारी जाके, खेवट आतम ध्यान ॥१॥
मन वच तन सुध जे भवि धारत, ते पहुंचत शिवथान ।
परत अथाह मिथ्यात भँवर ते, जे नहि गहत अजान ॥२॥
बिन अक्षर जिनमुख तैं निकसी, परी वरनजुत कान ।
हितदायक 'बुधजन' कों गनधर, गूंथे ग्रन्थ महान ॥३॥