झूल रहा पलने में
Karaoke :
तर्ज: चाँद जैसे मुखड़े पे बिंदिया
पौष महीना की वदी, ग्यारस तिथी महान,
अश्वसेन के अंगने, जन्मे श्री भगवान ॥
झूल रहा पलने में वामा दुलारा,
लागे है ऐसे जैसे चाँद, ही जमीं पे, हो उतारा,
दर्शनों को देवों की भीड़ है अपारा ।
सीप से जैसे मोती उपजे, उज्जवल जन-मनहारी ।
दीप से जैसे ज्योति उपजे, त्रिभुवन का तमहारी
वामा-माँ की कोख से उपजा, जगत का सहारा ॥१... लागे॥
खुशियों का चहुं-दिश में फैला, आलम सजा बनारस ।
सर्प चिन्ह-युत कदली-दल सम काया धारे पारस ।
हर्षित होके सहस नेत्र कर इन्द्र ने निहारा ॥२... लागे॥
पुत्र छवि को निरख-निरख कर, हर्षित वामा माता ।
अश्वसेन घर जन्म महोत्सव, लख जग-आनंद भाता ॥
बालक सबको दिखलाएगा, भव का ये किनारा ॥३... लागे॥