अब मेरे समकित सावन
Karaoke :
राग : मल्हार; तर्ज : आज मैं परम पदारथ
अब मेरे समकित सावन आयो ॥टेक॥
बीति कुरीति मिथ्या मति ग्रीषम, पावस सहज सुहायो ॥
अनुभव दामिनि दमकन लागी, सुरति घटा घन छायो
बोलै विमल विवेक पपीहा, सुमति सुहागिनि भायो ॥
अब मेरे समकित सावन आयो ॥१॥
गुरुधुनि गरज सुनत सुख उपजै, मोर सुमन विहसायो
साधक भाव अंकूर उठे बहु, जित तित हरष सवायो ॥
अब मेरे समकित सावन आयो ॥२॥
भूल धूल कहिं भूल न सूझत, समरस जल झर लायो
'भूधर' को निकसै अब बाहिर, निज निरचू घर पायो ॥
अब मेरे समकित सावन आयो ॥३॥