ओ जीवड़ा तू थारी करणी रो, फल इक दिन पावेलो पापां रो बांध्योड़ो बोझो, थारे सागै जावेलो ॥टेक॥
चार दिना री चाँदनी जी, फेर अँधेरी रात आयु पल पल बीतै छै जी, मत ना भूलो या बात पापां रो बांध्योड़ो बोझो, थारे सागै जावेलो ॥१॥
भाई बंधु साथी सगलां, कोई न साथै जाय जीव अकेलो अवतरयो जी, और अकेलो जाय पापां रो बांध्योड़ो बोझो, थारे सागै जावेलो ॥२॥
जो जैसी करनी करे जी, वैसो ही फल पाय पाप करयां दुःख ही मिले जी, जिनवाणी बतलाय पापां रो बांध्योड़ो बोझो, थारे सागै जावेलो ओ जीवड़ा तू थारी करणी रो, फल इक दिन पावेलो ॥३॥