किसको विपद सुनाऊँ हे नाथ
Karaoke :
तर्ज : वो दिल कहाँ से लाऊँ - भरोसा
किसको विपद सुनाऊँ, हे नाथ तू बता दे, (2)
तेरे सिवा न कोई जो कष्ट को मिटा दे ॥टेक॥
अपराध नाथ बेशक मैंने किये हैं भारी, (2)
हो दीन के दयालु, उनकी मुझे क्षमा दे ।
किसको विपद सुनाऊँ, हे नाथ तू बता दे ।
यह कर्म दुष्ट मुझको, भटका रहे हैं दर-दर, (2)
जीवन मरण के दु:ख से हे नाथ तू बचा दे ।
किसको विपद सुनाऊँ, हे नाथ तू बता दे ।
धन ज्ञान अपना खोकर, परेशान हो रहा हूँ, (2)
शान्ति हृदय में आवे, वो उपाय तो सुझा दे ।
किसको विपद सुनाऊँ, हे नाथ तू बता दे ।
टाला नहीं है टलता, विधि का उदय किसी से, (2)
'शिवराम' शोक चिंता, तू चित से हटा दे ।
किसको विपद सुनाऊँ, हे नाथ तू बता दे ।