चेतन जाग रे
Karaoke :
जाग जाग सुमति का प्यारा, काहे तू सोयो रे
चेतन जाग रे ॥टेक॥
अष्ट करममय मदिरा पीकर, भ्रमत महल में सोयो रे
कुमति की नारी लगे पियारी, तासंग सोयो रे ॥चेतन...१॥
चार गति का पलंग बिछाया, तकिया झूठ लगाया रे
मोह नींद में मगन होयकर, समय गंवाया रे ॥चेतन...२॥
विषय लूटरा धरम रतन को, निशदिन लूटा जाए रे
अब तो चेत काहे सोयो रे, फिर पछतावे रे ॥चेतन...३॥
सप्त व्यसन से करी मित्रता, तू जाने सुखदायी रे
जो कोई मूरख खाय धतूरा, कंचन माने रे ॥चेतन...४॥