जगत में सम्यक उत्तम
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राग : मल्हार
जगत में सम्यक उत्तम भाई
सम्यकसहित प्रधान नरक में, धिक शठ सुरगति पाई ॥टेक॥
श्रावक-व्रत मुनिव्रत जे पालैं, जिन आतम लवलाई ।
तिनतैं अधिक असंजमचारी, ममता बुधि अधिकाई ॥१॥
पंच-परावर्तन तैं कीनें, बहुत बार दुखदाई ।
लख चौरासी स्वांग धरि नाच्यौ, ज्ञानकला नहिं आई ॥२॥
सम्यक बिन तिहुँ जग दुखदाई, जहँ भावै तहँ जाई ।
'द्यानत' सम्यक आतम अनुभव, सद्गुरु सीख बताई ॥३॥