परिणामों से मोक्ष प्राप्त हो, परिणामों से बंध रे । परिणामों की दिव्य शक्ति से, कटे जगत के फंद रे ॥टेक॥
शुभ परिणाम स्वर्ग देते हैं, अशुभ नर्क दिखलाते हैं । यदि परिणाम शुद्ध होते तो, सिद्धालय पहुंचाते हैं ॥ केवलज्ञान प्रगट होता है, हो जाता परमानन्द रे । परिणामों से मोक्ष प्राप्त हो, परिणामों से बंध रे ॥१॥
निज अनुभव का रस पीते ही, मन विभोर हो जाता है । जो अनादि का राग बसा था, पल भर में खो जाता है ॥ निज ज्ञायक के आश्रय से ही, हो जाता सहजानन्द रे । परिणामों से मोक्ष प्राप्त हो, परिणामों से बंध रे ॥२॥