समकित सुंदर शांति अपार
Karaoke :
तर्ज : पतझड़ सावन बसंत बहार
समकित सुंदर शांति अपार
अल्प समय में लाखों बार - 3
पंच परमपद भाव का, समयसार का
अनुभव होवे... आतम भासे
हर गुण ताली बजाए
आतम अनुभव फिर-फिर होवे
हरएक क्षण में बार-बार... बार-बार ॥समकित...१॥
इंद्र-धनुष सा... जीवन सारा
तत्त्व समझ ले चेतन प्यारा
जैन धर्म है जग में न्यारा
निज में भव ले बेशुमार... बेशुमार ॥समकित...२॥
प्रभु मिले कब... चेतन तरसे
मोह के फंदे में आतप तड़पे
स्वयंसाध्य हो, वह साधन से
जान लो निज को अबकी बार, एक बार ॥समकित...३॥