सुन रे जिया चिरकाल गया
Karaoke :
सुन रे जिया चिरकाल गया,
तूने छोडा ना अब तक प्रमाद, जीवन थोडा रहा ॥
जिनवाणी कहती है तेरी कथा,
तूने भूल करी सही भारी व्यथा ।
अब कर ले स्वयं की पहचान, जीवन थोडा रहा ॥
जीव तत्व है तू परम उपादेय,
अजीव सभी हैं ज्ञान के ज्ञेय ।
निज को निज पर को पर जान, जीवन थोडा रहा ॥
आस्रव बंध ये भाव विकारी,
चेतन ने पाया दुख इनसे भारी ।
सम्यक्त्व को ले पहिचान, जीवन थोडा रहा ॥
संवर निर्जरा शुद्ध भाव है,
मोक्ष तत्व पूर्ण बंध अभाव है ।
इनको ही तू हित रूप मान, जीवन थोडा रहा ॥