सुमर सदा मन आतमराम
Karaoke :
राग : बिलावल, रघुपति राघव राजाराम
सुमर सदा मन आतमराम,
सुमर सदा मन आतमराम ॥टेक॥
स्वजन कुटुंबी जन तू पोषै,
तिनको होय सदैव गुलाम ।
सो तो हैं स्वारथ के साथी,
अंतकाल नहिं आवत काम ॥
सुमर सदा मन आतमराम ॥१॥
जिमि मरीचिका में मृग भटकै,
परत सो जब ग्रीषम अति धाम ।
तैसे तू भवमाहीं भटकै,
धरत न इक छिनहू विसराम ॥
सुमर सदा मन आतमराम ॥२॥
करत न ग्लानि अबै भोगन में,
धरत न वीतराग परिनाम ।
फिर किमि नरकमाहिं दुख सहसी,
जहाँ सुख लेश न आठौं जाम ॥
सुमर सदा मन आतमराम ॥३॥
तातैं आकुलता अब तजिकै,
थिर ह्वै बैठो अपने धाम ।
'भागचन्द' वसि ज्ञान नगर में,
तजि रागादिक ठग सब ग्राम ॥
सुमर सदा मन आतमराम ॥४॥