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श्री
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आज मैं परम पदारथ
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राग : मल्हार

आज मैं परम पदारथ पायौ
प्रभुचरनन चित लायौ ॥टेक॥

अशुभ गये शुभ प्रगट भये हैं
सहज कल्पतरु छायौ ॥१॥

ज्ञानशक्ति तप ऐसी जाकी
चेतनपद दरसायो ॥२॥

अष्टकर्म रिपु जोधा जीते
शिव अंकूर जमायौ ॥३॥

'दौलत' राम निरख निज प्रभो को
उरु आनन्द न समायो ॥४॥



अर्थ : अहो, आज मेरा भगवान के चरणों में चित्त लग गया है और मुझे परम-पदार्थ की प्राप्ति हो गयी है ॥

भगवान के चरणों मे चित्त लगाने से आज मेरे अशुभ भाव नष्ट हो गए है और शुभ भाव प्रकट हो गए है, अतः जीवन में सहज ही कल्पवृक्ष की छाया हो गयी है ॥१॥

भगवान के चरणों में चित्त लगाने से ही आज मुझे ऐसे चैतन्य पद के दर्शन हुए हैं, जिसमे अपार ज्ञान-वैराग्य शक्ति भरी हुई है ॥२॥

आज मैंने कर्म-शत्रु के आठ योद्धाओं को जीत लिया है और मोक्ष का अंकुर स्थापित कर लिया है ॥३॥
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