किये भव भव भव में फेरे
Karaoke :
तर्ज : उड़े जब जब जुल्फे तेरी - नया दौर
किये भव भव भव में फेरे,
विलासी होके नित मैंने, प्रभु मेरे हो ।
हुवा रत मैं इनमें ऐसा, (2)
कि तुझे विसरा मैंने, प्रभु मेरे हो ।
किये भव भव भव में फेरे ॥१॥
तजी आगम हित की वाणी, (2)
कि योगियों का संग छोड़ा, प्रभु मेरे हो ।
किये भव भव भव में फेरे ॥२॥
ओ ... मिले साथी अधम अधर्मी (2),
कि भोग रोग अंग दौड़ा, प्रभु मेरे हो ।
किये भव भव भव में फेरे ॥३॥
है आज घड़ी शुभ आई, (2)
कि दर्शन प्राप्त हुये, प्रभु मेरे हो ।
किये भव भव भव में फेरे ॥४॥
ओ .. घट ज्ञान रवि चमका है (2),
कि तिमिर समाप्त हुये, प्रभु मेरे हो ।
किये भव भव भव में फेरे ॥५॥
ओ .. जुड़ी आतम हित की कड़ियाँ (2),
कि जड़ से प्रीत उठी, प्रभु मेरे हो ।
किये भव भव भव में फेरे ॥६॥
'सौभाग्य' शज सुख पाऊँ (2),
कि तुझसे प्रीत जुड़ी, प्रभु मेरे हो ।
किये भव भव भव में फेरे ॥७॥