चादर हो गई बहुत
Karaoke :
चादर हो गई बहुत पुरानी,
अब तो सोच समझ अज्ञानी ॥टेक॥
अजब जुलाहा चादर बुनि है, सूत करम को तानी ।
पांचों मिलकर रेज़ा कीनों, तब सबके मन आनी ॥१॥
मैले दाग लगे पापन के, विषयन में लिपटानी ।
ज्ञान दीप का लिए सोधरा, व्रत-तप का ले पानी ॥२॥
भई खराब गई अब सारी, लोभ मोह में सानी ।
ऐसी ओढ़त उमर गमाई, भली बुरी नहीं जानी ॥३॥
संशय छोड़ जान मन अपने, ये है वस्तु बिरानी ।
'भूधर' कहिए राख जतन से, फेर ये हाथ ना आनी ॥४॥