nikkyjain@gmail.com

🙏
श्री
Click Here

परम जननी धरम कथनी
Karaoke :

परम जननी धरम कथनी, भवार्णव पार कौ तरनी ।
अनक्षरि घोष आपत की, अक्षरजुत गनधरौं वरनी ॥टेक॥

निरवेयौ नयनु जोगन ते, भविन कौं तत्व अनुसरनी ।
विथरनी शुद्ध दरसन की, मिथ्यातम मोह की हरनी ॥१॥

मुकति मन्दिर के चढ़ने को, सुगम-सी सरल निसरनी ।
अंधेरे कूप में परतां, जगत उद्धार की करनी ॥२॥

तृषा के ताप मेटन कौ, करत अमृत वचन झरनी ।
कथंचित वाद आदरनी, अवर एकान्त परिहरनी ॥३॥

तेरा अनुभौ करत मोकौं, बनत आनन्द उर भरनी ।
फिर पौ संसार दुखिया हूँ, गही अब आनि तुम सरनी ॥४॥

अरज 'बुधजन' की सुन जननी, हरौ मेरी जनम मरनी ।
नमूं कर जोरि मन वचतैं, लगा के सीस कौं धरनी ॥५॥

Close

Play Jain Bhajan / Pooja / Path

Radio Next Audio

देव click to expand contents

शास्त्र click to expand contents

गुरु click to expand contents

कल्याणक click to expand contents

अध्यात्म click to expand contents

पं दौलतराम कृत click to expand contents

पं भागचंद कृत click to expand contents

पं द्यानतराय कृत click to expand contents

पं सौभाग्यमल कृत click to expand contents

पं भूधरदास कृत click to expand contents

पं बुधजन कृत click to expand contents

पर्व click to expand contents

चौबीस तीर्थंकर click to expand contents

दस धर्म click to expand contents

selected click to expand contents

नित्य पूजा click to expand contents

तीर्थंकर click to expand contents

पाठ click to expand contents

स्तोत्र click to expand contents

द्रव्यानुयोग click to expand contents

द्रव्यानुयोग click to expand contents

द्रव्यानुयोग click to expand contents

loading