भजन बिन योंही जनम गमायो
Karaoke :
राग : पूरवी
भजन बिन यौं ही जनम गमायो ।
पानी पैल्यां पाल न बांधी, फिर पीछैं पछतायो ॥टेक॥
रामा-मोह भये दिन खोवत, आशा-पाश बंधायो ।
जप तप संजम दान न दीनौं, मानुष जनम हरायो ॥
भजन बिन यौं ही जनम गमायो ॥१॥
देह सीस जब कांपन लागी, दसन चलाचल थायो ।
लागी आगि भुजावन कारन, चाहत कूप खुदायो ॥
भजन बिन यौं ही जनम गमायो ॥२॥
काल अनादि गमायो भ्रमतां, कबहुँ न थिर चित ल्यायो ।
हरी विषयसुख भरम भूलानो, मृग तिसना-वश धायो ॥
भजन बिन यौं ही जनम गमायो ॥३॥