मत तोरे मेरे शील का सिंगार
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सीता रावण प्रकरण
मत तोरे तोरे तोरे मेरे शील का सिंगार ।
शील का सिंगार मेरा धर्म का सिंगार ॥टेक॥
राजा तेरे रानी कहिये, आष्टादश हजार ।
जिस पर तू परतिरया लोभी, जीवन धिक्कार ॥
मत तोरे तोरे तोरे मेरे शील का सिंगार ॥१॥
लाया क्यों नहीं जीत स्वयम्वर खुले दरबार ।
दण्डक वन से लाया मुझको करके मायाचार ॥
मत तोरे तोरे तोरे मेरे शील का सिंगार ॥२॥
मत ना हाथ लगाना मुझको पापी दुराचार ।
मैं राखूंगी शील शिरोमणि नातर मरूं इसबार ॥
मत तोरे तोरे तोरे मेरे शील का सिंगार ॥३॥
'न्यामत' शील जगत में कहिये परम हितकार ।
अरे जो कोई याको त्यागे पड़े नरक मंझार ॥
मत तोरे तोरे तोरे मेरे शील का सिंगार ॥४॥