भ्रात ऐसी खेलिये
Karaoke :
तर्ज : मुझको अपने गले लगा लो
श्याम मौसे खेलो ना होली
भ्रात ऐसी खेलिये होरी, जामें हो हित तोरी ॥टेक॥
प्रेम गुलाल मलो मुख ऊपर, सुमता से फाग रचोरी ।
क्रोध लोभ मद काष्ट जला कर, फूँक देओ जैसी होरी ॥
भ्रात ऐसी खेलिये होरी, जामें हो हित तोरी ॥१॥
झूठ कपट तज होरी खेली, निज कल्याण करोजी ।
कुंकुम संयम सील बनावो, डारो भर-भर झोरी ॥
भ्रात ऐसी खेलिये होरी, जामें हो हित तोरी ॥२॥
'न्यामत' ऐसी होरी खेलो, आतम ध्यान धरोजी ।
राग द्वेष मन दूर करो सब, छोडो निठुर जोरा जोरी ॥
भ्रात ऐसी खेलिये होरी, जामें हो हित तोरी ॥३॥