अरे मन पापनसों नित डरिये
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राग : आसावरी
अरे मन पापनसों नित डरिये ॥टेक॥
हिंसा झूँठ वचन अरु चोरी, परनारी नहीं हरिये ।
निज पर को दुखदायन डायन, तृष्णा वेग विसरिये ॥
अरे मन पापनसों नित डरिये ॥१॥
जासों परभव बिगड़े वीरा, ऐसो काज न करिये ।
क्यों मधु-बिन्दु विषय के कारण, अंधकूप में परिये ॥
अरे मन पापनसों नित डरिये ॥२॥
गुरु उपदेश विमान बैठके, यहाँ ते बेग निकरिये ।
'नयनानन्द' अचल पद पावे, भवसागर सो तिरिये ॥
अरे मन पापनसों नित डरिये ॥३॥