अब घर आये चेतनराज
Karaoke :
अब घर आये चेतनराज, सजनी खेलौंगी मैं होरी ॥टेक॥
आरस सोच कानि कुल हरिकै, धरि धीरज वरजोरी ॥1॥
बुरी कुमति की बात न बूझै, चितवत है मो ओरी ।
वा गुरुजन की बलि ले जाऊं, दूरि करी मति भोरी ॥2॥
निज सुभाव जल हौज भराऊं, घोरूं निजरँग रोरी ।
निज ल्यौं ल्याय शुद्ध पिचकारी, छिरकन निज मति दोरी ॥3॥
गाय रिझाय आप वश करिकै, जावन द्यौं नहि पोरी ।
'बुधजन' रचि पचि रहूं निरंतर, शक्ति अपूरव मोरी ॥4॥