खेलूंगी होरी श्रीजिनवर
Karaoke :
श्री जिनवर दरबार, खेलूंगी होरी ॥टेक॥
पर विभाव का भेष उतारूं, शुद्ध स्वरूप बनाय ॥१॥
कुमति नारिकौं संग न राखूं, सुमति नारि बुलवाय ॥२॥
मिथ्या भसमी दूर भगाउफं, समकित रंग चुवाय ॥३॥
निजरस छाक छक्यौ 'बुधजन' अब, आनँद हरष बढाय ॥4॥