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श्री
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अजित जिनेश्वर
Karaoke :
राग : गौरी
तर्ज : प्यार में होता है क्या जादू

अजित जिनेश्वर अघहरणं, अघहरणं अशरन-शरणं ॥
निरखत नयन तनक नहिं त्रिपते, आनंदजनक कनक-वरणं ॥

करुणा भीजे वायक जिनके, गणनायक उर आभरणं ।
मोह महारिपु घायक सायक, सुखदायक, दुखछय करणं ॥१॥

परमातम प्रभु पतित-उधारन, वारण-लच्छन-पगधरणं ।
मनमथमारण, विपति विदारण, शिवकारण तारणतरणं ॥२॥

भव-आताप-निकंदन-चंदन, जगवंदन बांछा भरणं ।
जय जिनराज जगत वंदत जिहँ, जन 'भूधर' वंदत चरणं ॥३॥

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