छायो छायो छायो रे छायो, आनंद छायो रे जन्मकल्याणक आयो रे आयो आयो आयो रे आयो, जिन शिशु आयो रे मरुदेवी ने जायो रे ॥
देव-देवियाँ नृत्य रचाएँ, हर्षित हैं, सब सुरबालाएँ जिनवर की भक्ति के रंग में, हम सब भी रंग जाएँ ओऽऽऽसभी नाचे गाएँ झूम-झूम कर नाच-नाचकर हर्षोत्सव मनाएँ छायो छायो…॥१॥