लागे सत्य सुमन
Karaoke :
तर्ज : मूंजी धरी रहे ली पूंजी - रसियां
लागे सत्य सुमन बिन खारी, सारी जीवन की क्यारी ।
झूठ कपट छल आक धतूरा, काम थोर काँटा सू पूरा,
फूल्या घेर घुमेर चाह बिन मन धरसी थारी ॥
लागे सत्य सुमन बिन खारी, सारी जीवन की क्यारी ॥१॥
लाल बोराँ की झाड़ी ऊपर कोमल अन्तर भारी,
फूल तो काँटा छिद जावे पोर आंगल्या सारी ॥
लागे सत्य सुमन बिन खारी, सारी जीवन की क्यारी ॥२॥
स्व स्वरूप की परख सत्य है, जड़ अनित्य चैतन नित्य है,
गंध हीन टेसू सू प्यारा, मत कर तू यारी ॥
लागे सत्य सुमन बिन खारी, सारी जीवन की क्यारी ॥३॥
झूठन से भी झूठ बुरी है, मिथ्या दरसन पाप धुरी है,
वीतराग सत सुमन संजोले अक्षय फुलवारी ॥
लागे सत्य सुमन बिन खारी, सारी जीवन की क्यारी ॥४॥
बार-बार मानव कुल धरणी, देह निरोगी उत्तम करणी,
कठिन श्रेष्ठ 'सौभाग्य' मिलन है, आगम हितकारी ॥
लागे सत्य सुमन बिन खारी, सारी जीवन की क्यारी ॥५॥