आवै न भोगन में तोहि
Karaoke :
आवै न भोगन में तोहि गिलान ॥टेक॥
तीरथनाथ भोग तजि दीनें, तिनतैं मन भय आन ।
तू तिनतैं कहुँ डरपत नाहीं, दीसत अति बलवान ॥१॥
इन्द्रियतृप्ति काज तू भोगै, विषय महा अघखान ।
सो जैसे घृतधारा डारै, पावकज्वाल बुझान ॥२॥
जे सुख तो तीक्षन दुखदाई, ज्यों मधुलिप्त-कृपान ।
तातें 'भागचन्द' इनको तजि आत्म स्वरूप पिछान ॥३॥