जैन वर्ग पहेली - 2





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बाएं से दाएं
1) मुनिराज सहन करते हैं
3) व्रत की अपेक्षा रखते हुए भी उसका एकदेश भंग होना
5) अशुचि भावना में ’मांस’ का पर्यायवाची
8) जिसकी शुरुवात न हो
10) अनंत धर्मात्मक वस्तु को एक धर्म वाला कहना = _____वाद
11) पत्नि
12) फ़णधारी सांप
15) बुढापा इसके समान है
16) सम्यक श्रद्धान होने के बाद _____ का सेवन करना चाहिये
17) धन्य हैं वे जीव जिन्होने ______ पाने के बाद मोक्ष-सुख के हेतु संसार को छोड दिया
19) कुगुरु-कुदेव-कुधर्म और उनके सेवक
20) 18-दोषों से रहित
21) सिद्ध अवस्था प्राप्त होने के बाद जीव _______ काल तक उसी रूप रहता है
22) सिद्ध भगवान का पर्यायवाची, कर्म रहित
24) ’कुछ है’, किंतु क्या है इसके निश्चयरहित ज्ञान
27) निश्चय-व्यवहार ( छ्ठी ढाल )
28) दौलतरामजी ने कुगुरु को ____ __ ____ की उपमा दी है (३,१,२)
30) इस निर्ज्ररा के कारण हम कई बार स्वर्गों में गए
31) मुनि-महारज सोने में और ____ में समान भाव रखते हैं
33) श्रेष्ठ, उत्तम
34) रंग
35) मर्यादा (अवधि-ज्ञान के प्रसंग में)
37) सोना, स्वर्ण
39) वीतरागतापूर्ण ध्यान
41) अरिहंत परमेष्टि = ______ परमात्मा
43) ज्ञान-दर्शन अथवा जानने देखने की शक्ति
44) महाव्रतों के धारक
46) मुनि _____ प्रकार के चारित्र का पालन करते हैं
48) प्रमाद ( स्वरूप में असावधानी )
49) शरीर
50) सोलह स्वर्गॊं के ऊपर के देव
53) अग्नि, आग
56) एक द्रव्य
57) स्पर्श –रस – गंध – वर्ण रहित
58) जो स्वयं कार्य-रूप न परिणमें, मगर कार्य की उतपत्ति के समय उपस्थित रहे (३,३)
60) _____ भ्र्मण की है बहुकथा
62) सकल-व्रत
63) चरबी
64) मोह-युक्त जीव
65) काल की मर्यादा लिये हुए विरक्ति
67) सम्यक-दर्शन-ज्ञान-चारित्र रूपी जो ______ है उसका दो प्रकार से निरूपण किया है
68) सम्यक-दर्शन की महिमा - ______ ____ को मूल यही ...
ऊपर से नीचे
1) इन्द्रिय और मन की सहायता से होने वाला ज्ञान = ______ ज्ञान
2) स्पर्श का एक भेद
3) शत्रु
4) ईर्या समिति = ____ हाथ आगे की जमीन को देखकर चलना
5) उत्तम अम्रत
6) साम्यभाव = ____ भाव
7) निक्षेप का प्रकार ( अरिहंत भगवान की प्रतिमा इस निक्षेप से पूजित होती है )
8) जिसमें कोई दोष न हॊ
9) इसका पालन करने से सोलहवें स्वर्ग तक उत्पन्न होता है
10) दिन में एक बार आहार लेना
13) जाना और आना
14) स्वरूपाचरण चारित्र में ___ , ____ , ____ में भेद नहीं होता
15) द्रव्य-क्षेत्र-काल-भाव की मर्यादा लिये हुए रूपी पदार्थॊं को स्पष्ट जानने वाला ज्ञान
17) पुरुष का शरीर
18) हिरण का समूह
21) अपरिग्रही मुनि
23) असि-धनु-हल = _______ (हिसादान अनर्थ-दंड)
25) _____ नाम कर्म से एक शरीर के अनेक मालिक होत हैं
26) त्रस-पर्याय का प्राप्त होना उतना ही कढिन है जितना कि _______ का मिलना
27) ____ सकलव्रति बडभागी
28) संसार में चारों गतियों में पुनः पुनः भ्रमण
29) गुप्ति का एक भेद
30) प्रयोजनरहित मन-वचन-काय की अशुभ प्रव्रत्ति का त्याग
32) बिजली
33) शिक्षा-व्रत का एक भेद
36) चार प्रकार के देव में से एक
38) अविरत सम्यक्त्वी की महिमा - _______ वश लेश न संयम ...
40) सम्यक प्रकार निरोध मन-वच-काय आतम ____
41) ऋजु, सीधा
42) देखना ( ____ कै गहे ____ कै धरे )
44) निज काल पाय विधि .... यहां किस निर्जरा का प्रसंग चल रहा है
45) ये _____ एकै लसा
47) बहुमूल्य पत्थर
48) मोक्ष = ______ बिन
50) नरक में ________ जाति के देव नारकियों को आपस में लडवाते हैं
51) षटकाय जीवों की हिंसा
52) सम्यक्त्व का एक गुण
54) पीडा देने वाला
55) सम्यकज्ञान बिना ________ पालकर जीव अनन्त बार ग्रैवियक में गया
59) भाषा समिति पूर्वक कम शब्दों का उपयोग
61) मुनि पांच _____ का पालन करते हैं
65) हमेशा, हर
66) कचरा
67) मिथ्यात्व