बाएं से दाएं 1) मुनिराज सहन करते हैं 3) व्रत की अपेक्षा रखते हुए भी उसका एकदेश भंग होना 5) अशुचि भावना में ’मांस’ का पर्यायवाची 8) जिसकी शुरुवात न हो 10) अनंत धर्मात्मक वस्तु को एक धर्म वाला कहना = _____वाद 11) पत्नि 12) फ़णधारी सांप 15) बुढापा इसके समान है 16) सम्यक श्रद्धान होने के बाद _____ का सेवन करना चाहिये 17) धन्य हैं वे जीव जिन्होने ______ पाने के बाद मोक्ष-सुख के हेतु संसार को छोड दिया 19) कुगुरु-कुदेव-कुधर्म और उनके सेवक 20) 18-दोषों से रहित 21) सिद्ध अवस्था प्राप्त होने के बाद जीव _______ काल तक उसी रूप रहता है 22) सिद्ध भगवान का पर्यायवाची, कर्म रहित 24) ’कुछ है’, किंतु क्या है इसके निश्चयरहित ज्ञान 27) निश्चय-व्यवहार ( छ्ठी ढाल ) 28) दौलतरामजी ने कुगुरु को ____ __ ____ की उपमा दी है (३,१,२) 30) इस निर्ज्ररा के कारण हम कई बार स्वर्गों में गए 31) मुनि-महारज सोने में और ____ में समान भाव रखते हैं 33) श्रेष्ठ, उत्तम 34) रंग 35) मर्यादा (अवधि-ज्ञान के प्रसंग में) 37) सोना, स्वर्ण 39) वीतरागतापूर्ण ध्यान 41) अरिहंत परमेष्टि = ______ परमात्मा 43) ज्ञान-दर्शन अथवा जानने देखने की शक्ति 44) महाव्रतों के धारक 46) मुनि _____ प्रकार के चारित्र का पालन करते हैं 48) प्रमाद ( स्वरूप में असावधानी ) 49) शरीर 50) सोलह स्वर्गॊं के ऊपर के देव 53) अग्नि, आग 56) एक द्रव्य 57) स्पर्श –रस – गंध – वर्ण रहित 58) जो स्वयं कार्य-रूप न परिणमें, मगर कार्य की उतपत्ति के समय उपस्थित रहे (३,३) 60) _____ भ्र्मण की है बहुकथा 62) सकल-व्रत 63) चरबी 64) मोह-युक्त जीव 65) काल की मर्यादा लिये हुए विरक्ति 67) सम्यक-दर्शन-ज्ञान-चारित्र रूपी जो ______ है उसका दो प्रकार से निरूपण किया है 68) सम्यक-दर्शन की महिमा - ______ ____ को मूल यही ...
ऊपर से नीचे 1) इन्द्रिय और मन की सहायता से होने वाला ज्ञान = ______ ज्ञान 2) स्पर्श का एक भेद 3) शत्रु 4) ईर्या समिति = ____ हाथ आगे की जमीन को देखकर चलना 5) उत्तम अम्रत 6) साम्यभाव = ____ भाव 7) निक्षेप का प्रकार ( अरिहंत भगवान की प्रतिमा इस निक्षेप से पूजित होती है ) 8) जिसमें कोई दोष न हॊ 9) इसका पालन करने से सोलहवें स्वर्ग तक उत्पन्न होता है 10) दिन में एक बार आहार लेना 13) जाना और आना 14) स्वरूपाचरण चारित्र में ___ , ____ , ____ में भेद नहीं होता 15) द्रव्य-क्षेत्र-काल-भाव की मर्यादा लिये हुए रूपी पदार्थॊं को स्पष्ट जानने वाला ज्ञान 17) पुरुष का शरीर 18) हिरण का समूह 21) अपरिग्रही मुनि 23) असि-धनु-हल = _______ (हिसादान अनर्थ-दंड) 25) _____ नाम कर्म से एक शरीर के अनेक मालिक होत हैं 26) त्रस-पर्याय का प्राप्त होना उतना ही कढिन है जितना कि _______ का मिलना 27) ____ सकलव्रति बडभागी 28) संसार में चारों गतियों में पुनः पुनः भ्रमण 29) गुप्ति का एक भेद 30) प्रयोजनरहित मन-वचन-काय की अशुभ प्रव्रत्ति का त्याग 32) बिजली 33) शिक्षा-व्रत का एक भेद 36) चार प्रकार के देव में से एक 38) अविरत सम्यक्त्वी की महिमा - _______ वश लेश न संयम ... 40) सम्यक प्रकार निरोध मन-वच-काय आतम ____ 41) ऋजु, सीधा 42) देखना ( ____ कै गहे ____ कै धरे ) 44) निज काल पाय विधि .... यहां किस निर्जरा का प्रसंग चल रहा है 45) ये _____ एकै लसा 47) बहुमूल्य पत्थर 48) मोक्ष = ______ बिन 50) नरक में ________ जाति के देव नारकियों को आपस में लडवाते हैं 51) षटकाय जीवों की हिंसा 52) सम्यक्त्व का एक गुण 54) पीडा देने वाला 55) सम्यकज्ञान बिना ________ पालकर जीव अनन्त बार ग्रैवियक में गया 59) भाषा समिति पूर्वक कम शब्दों का उपयोग 61) मुनि पांच _____ का पालन करते हैं 65) हमेशा, हर 66) कचरा 67) मिथ्यात्व