गुणस्थानों में कर्मों के सत्ता की सारिणी


लाल रंग उस गुणस्थान में कर्म की व्युच्छिति दर्शाता है
कर्म-सत्ता सारिणी
गुणस्थान सत्ता [क्षायोपशमिक और औपशमिक] कुल क्षायिक- सम्यकदृष्टि सत्ता [क्षपक श्रेणी] कुल
1 मिथ्यात्व   148    
2 सासादन (-3) आहारक शरीर, आहारक अंगोपांग, तीर्थंकर 145    
3 मिश्र (+2) आहारक शरीर, आहारक अंगोपांग 147    
4 अविरत (+1) तीर्थंकर 148 (-7) दर्शन मोहनीय [मिथ्यात्व, सम्यक-मिथ्यात्व,सम्यक-प्रकृति], अनंतानुबंधी ४ 141
5 देशविरत (-1) नरक आयु 147 (-1) नरक आयु 140
6 प्रमत्तसंयत (-1) तिर्यन्च आयु 146 (-1) तिर्यन्च आयु 139
7 अप्रमत्तसंयत        
8 अपूर्वकरण (-4) अनंतानुबंधी ४ 142 (-1) देव आयु 138
9 अनिवृतिकरण        
10 सूक्ष्मसाम्पराय     (-36) अप्रत्याख्यानावरण ४, प्रत्याख्यानावरण ४, संज्ज्वलन ४,  नोकषाय ९,  जाति ४ [१ से ४ इंद्रिय], सूक्ष्म, स्थावर, साधारण, आतप, उद्योत, गति [नरक, तिर्यन्च], गत्यानुपूर्व्य [नरक, तिर्यन्च], दर्शनावर्णी [निद्रा-निद्रा, प्रचला-प्रचला, स्त्यानगृद्धि] 102
11 उपशान्तमोह        
12 क्षीणमोह     (-1) सूक्ष्म लोभ 101
13 सयोगकेवली     (-16) ज्ञानावरण ५, दर्शनावरण-[अवधि, केवल, निद्रा, प्रचला, चक्षु, अचक्षु], अंतराय ५ 85
14 अयोगकेवली    
(-72) वेदनीय (कोइ 1), नीच गोत्र, देव गति, देव अनुपूर्व्य, 3 अंगोपांग (औदारिक, आहारक, वैक्रियिक), 5 शरीर(औदारिक, आहारक, वैक्रियिक, तैजस, कार्माण), निर्माण, 5 बंधन, 5 संघात ,6 संहनन(वज्रवृषभनाराच, वज्रनाराच, नाराच, कीलक, अर्द्धनाराच, असंप्राप्तासृपाटिका), 6 संस्थान(समचतुस्र, स्वाति, हुण्डक, न्यग्रोधपरिमन्डल, कुब्जक, वामन), 20 (स्पर्श 8,रस 5,गंध 2,वर्ण 5), अगुरुलघु, उपघात, परघात, उच्छवास, प्रत्येक, शुभ, अशुभ, स्थिर, अस्थिर, 2 विहायोगति (प्रशस्त, अप्रशस्त), सुस्वर, दुस्वर, अपर्याप्त, दुर्भग, अनादेय, अयशःकीर्ति
(-13) वेदनीय (कोइ 1), उच्च गोत्र, मनुष्य गति, मनुष्य आयु, मनुष्य अनुपूर्व्य, पंचेन्द्रिय जाति, त्रस, बादर, पर्याप्त, सुभग, आदेय, यशःकीर्ति, तीर्थंकर
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