
ये मूढा लिप्सवो मोक्षं परद्रव्यमुपासते ।
ते यान्ति सागरं मन्ये हिमवन्तं यियासव: ॥50॥
अन्वयार्थ : ये मोक्षं लिप्सव: परद्रव्यं उपासते ते मूढा: हिमवन्तं यियासव: सागरं यान्ति; मन्ये ।
जो मोक्ष की लालसा रखते हुए भी परद्रव्य की उपासना करते हैं , वे मूढ़, अज्ञानीजन हिमवान पर्वत पर चढ़ने के इच्छुक होते हुए भी समुद्र की ओर चले जाते हैं; ऐसा मैं मानता हूँ ।