
ध्रौव्योत्पादलयालीढा सत्ता सर्वपदार्थगा ।
एकशोऽनन्तपर्याया प्रतिपक्षसमन्विता ॥65॥
अन्वयार्थ : सत्ता ध्रौव्य-उत्पाद-लय-आलीढ़ा, एकशः सर्वपदार्थगा, अनन्तपर्याया, प्रतिपक्षसमन्विता ।
सत्ता अर्थात् अस्तित्व ध्रौव्योत्पादव्ययात्मिका, एक से लेकर सब पदार्थों में व्यापनेवाली, अनन्त पर्यायों को धारण करनेवाली और विरुद्ध पक्ष सहित होती है ।