
प्रदेशा नभसोऽ नन्ता अनन्तानन्तमानका: ।
पुद्गलानां जिनैरुक्ता: परमाणुरनंशक: ॥70॥
अन्वयार्थ : जिनै: नभस: अनन्ता: पुद्गलानां अनंतानंत-मानका: प्रदेशा: उक्ताः, परमाणु: अनंशक: ।
जिनेन्द्र देव ने आकाश द्रव्य के अनंत और पुद्गल द्रव्यों के अनन्तानन्त प्रदेश कहे हैं । उसीतरह पुद्गल परमाणु को अप्रदेशी कहा है ।