
द्रव्यतो भोजकः कश्चिद्भावतोऽस्ति त्वभोजकः ।
भावतो भोजकस्त्वन्यो द्रव्यतोऽस्ति त्वभोजकः ॥245॥
अन्वयार्थ : कश्चित् द्रव्यत: भोजक: भावत: तु अभोजक: अस्ति । अन्य: तु भावत: भोजक: द्रव्यत: तु अभोजक: अस्ति ।
कोई ज्ञानी जीव द्रव्य से भोक्ता है, वही जीव भाव से अभोक्ता है । दूसरा मिथ्यादृष्टि/अज्ञानी जीव भाव से भोक्ता है और वही जीव द्रव्य से अभोक्ता है ।