
कुल-जाति-वयो-देह-कृत्य-बुद्धि-क्रुधादयः ।
नरस्य कुत्सिता व्यंगास्तदन्ये लि'योग्यता ॥408॥
अन्वयार्थ : कुत्सिता: कुल-जाति-वय:-देह-कृत्य-बुद्धि-क्रुधादय: नरस्य व्यंग: । तद् अन्ये लिंगयोग्यता ।
जिनलिंग के ग्रहण करने में कुकुल, कुजाति, कुवय, कुकृत्य, कुबुद्धि और कुक्रोधादिक ये मनुष्य के जिनलिंग ग्रहण करने में व्यंग हैं/भंग हैं/बाधक हैं । इनसे भिन्न सुकुल, सुजाति आदि जिनलिंग-ग्रहण करने की योग्यता लिये हुए हैं ।