
कन्दो मूलं फलं पत्रं नवनीतमगृघ्नुभिः ।
अनेषणीयमग्राह्यमन्नमन्यदपि त्रिधा ॥419॥
अन्वयार्थ : अगृघ्नुभि: कन्द: मूलं फलं पत्रं नवनीतं अन्यत् अपि अग्राह्यं अन्नं त्रिधा ।
भोजन में लालसा रहित साधु कन्द, मूल, फल, फूल, पत्र, मक्खन आदि अभक्ष्य पदार्थ एवं उद्गमादि दोषों से दूषित होने से अग्राह्य ऐसे अन्न / भोजनादि का भी मन-वचन-काय से और कृत-कारित-अनुमोदना से त्याग करते हैं ।