+ आगम के अध्ययन में प्रवृत्ति की प्रेरणा - -
एकाग्रनसः साधोः पदार्थेषु विनिश्चयः ।
यस्मादागमतस्तस्मात् तस्मिन्नाद्रियतां तराम् ॥424॥
अन्वयार्थ : यस्मात् एकाग्रनस: साधो: पदार्थेषु विनिश्चय: आगमत: (भवति) । तस्मात् तस्मिन् (आगमे) तराम् आद्रियताम् ।
तीन लोक में स्थित सर्व पदार्थ संबंधी यथार्थ निर्णय/निश्चय एकाग्रचित्त के धारक साधु को जिनेन्द्रकथित आगम के अध्ययन से ही होता है । इसलिए साधु को विशेष आदर से आगम में प्रवृत्ति करना चाहिए अर्थात् आगम एवं परमागम का अध्ययन अत्यंत सूक्ष्मता से तथा सन्मानपूर्वक करना आवश्यक है ।