
निर्वाणसंज्ञितं तत्त्वं संसारातीतलक्षणम् ।
एकमेवावबोद्धव्यं शब्दभेदेऽपि तत्त्वतः ॥445॥
अन्वयार्थ : संसारातीतलक्षणं निर्वाणसंज्ञितं तत्त्वं शब्दभेदे अपि तत्त्वत: एकं एव अवबोद्धव्यम् ।
शास्त्र में ज्ञानियों ने अनेक शब्दों द्वारा एक ही मोक्ष तत्त्व को कहा है; तथापि संसार से अतीत इस लक्षण को प्राप्त निर्वाण अर्थात् मोक्षतत्त्व वस्तुतः एक ही है, अनेक नहीं; ऐसा जानना चाहिए ।