+ योग का लक्षण - -
विविक्तात्म-परिज्ञानं योगात्संजायते यतः ।
स योगो योगिभिर्गीतो योगनिर्धूत-पातकैः ॥466॥
अन्वयार्थ : यत: योगात् विविक्तात्म-परिज्ञानं संजायते (तत:) योगनिर्धूत-पातकै: योगिभि: स: योग: गीत: ।
जिस योग से अर्थात् ध्यान से शुद्ध आत्मा का अत्यंत स्पष्ट ज्ञान होता है, उसे जिन्होंने योग के द्वारा पातक अर्थात् घातिकर्मों का नाश किया है - ऐसे योगियों ने योग कहा है ।