
सर्वार्थसिद्धि :
क्रोधप्रत्याख्यान, लोभप्रत्याख्यान, भीरुत्वप्रत्याख्यान, हास्यप्रत्याख्यान और अनुवीचीभाषण ये सत्य व्रत की पाँच भावनाएँ हैं । अनुवीचीभाषण का अर्थ निर्दोष भाषण है । अब तीसरे व्रत की कौनसी भावनाएँ हैं, यह बतलाने के लिए आगे का सूत्र कहते हैं - |
राजवार्तिक :
क्रोधत्याग, लोभत्याग, भयत्याग, हास्यत्याग और अनुवीचिभाषण-विचारपूर्वक बोलना ये पाँच सत्यव्रत की भावनाएँ हैं। पुण्यास्रव का प्रकरण होने से अप्रशस्त क्रिया करनेवाले पापी के भाषण को अनुवीचिभाषण नहीं कह सकते। |