+ सत्य व्रत की भावनाएँ -
क्रोध-लोभ-भीरुत्व-हास्य-प्रत्याख्यानान्यनुवीचि-भाषणं च पञ्च ॥5॥
अन्वयार्थ : क्रोधप्रत्याख्यान, लोभप्रत्याख्यान, भीरुत्वप्रत्याख्यान, हास्यप्रत्याख्यान और अनुवीचीभाषण ये सत्य व्रत की पाँच भावनाएँ हैं ॥५॥
Meaning : Giving up anger, greed, cowardice or fearfulness, and jest, and speaking harmless words are five.

  सर्वार्थसिद्धि    राजवार्तिक 

सर्वार्थसिद्धि :

क्रोधप्रत्याख्यान, लोभप्रत्याख्यान, भीरुत्वप्रत्याख्यान, हास्यप्रत्याख्यान और अनुवीचीभाषण ये सत्य व्रत की पाँच भावनाएँ हैं । अनुवीचीभाषण का अर्थ निर्दोष भाषण है ।

अब तीसरे व्रत की कौनसी भावनाएँ हैं, यह बतलाने के लिए आगे का सूत्र कहते हैं -
राजवार्तिक :

क्रोधत्याग, लोभत्याग, भयत्याग, हास्यत्याग और अनुवीचिभाषण-विचारपूर्वक बोलना ये पाँच सत्यव्रत की भावनाएँ हैं। पुण्यास्रव का प्रकरण होने से अप्रशस्त क्रिया करनेवाले पापी के भाषण को अनुवीचिभाषण नहीं कह सकते।