अन्वयार्थ : पूर्वप्रयोग से, संग का अभाव होने से, बन्धन के टूटने से और वैसा गमन करना स्वभाव होने से मुक्त जीव ऊर्ध्वगमन करता है ॥६॥
Meaning : As the soul is previously impelled, as it is free from ties or attachment, as the bondage has been snapped, and as it is of the nature of darting upwards.
सर्वार्थसिद्धि राजवार्तिक
सर्वार्थसिद्धि :
कहते हैं, पुष्कल (बहुत) भी हेतु दृष्टान्त द्वारा समर्थन के बिना अभिप्रेत अर्थ की सिद्धि करने में समर्थ नहीं होते इसलिए आगे का सूत्र कहते हैं --