
मणवयणकायदव्वा आयत्त जस्स इन्दिया विसया
आयदणं जिणमग्गे णिद्दिट्ठं संजयं रूवं ॥5॥
मनोवचनकायद्रव्याणि आयत्त: यस्य ऐन्द्रिया: विषया: ।
आयतनं जिनमार्गे निर्दिष्टं संयतं रूपम् ॥५॥
आधीन जिनके मन-वचन-तन इन्द्रियों के विषयसब ।
कहे हैं जिनमार्ग में वे संयमी ऋषि आयतन ॥५॥
अन्वयार्थ : [जस्स] जिसके [दव्वा] द्रव्य-रूप [मणवयणकाय] मन, वचन, काय और [इंदियाविसया] इन्द्रियों के विषय [आयत्ता] अधीन है, ऐसे [संजयंरूवं] संयत रूप को [जिणमग्गे] जिनमार्ग / जिनागम में [आयदणं] आयतन [णिद्दिट्ठं] निर्दिष्ट है ।
जचंदछाबडा