
जचंदछाबडा :
शिवकुमार ने भाव की शुद्धता से ब्रह्म-स्वर्ग में विद्युन्माली देव होकर वहाँ से चय जंबूस्वामी केवली होकर मोक्ष प्राप्त किया । उसकी कथा इसप्रकार है :- इस जम्बूद्वीप के पूर्व विदेह में पुष्कलावती देश के वीतशोकपुर में महापद्म राजा बनमाला रानी के शिवकुमार नामक पुत्र हुआ । वह एक दिन मित्र सहित वन-क्रीड़ा करके नगर में आ रहा था । उसने मार्ग में लोगों को पूजा की सामग्री ले जाते हुए देखा । तब मित्र को पूछा -- ये कहाँ जा रहे हैं ? मित्र ने कहा, ये सागरदत्त नामक ऋद्धिधारी मुनि को पूजने के लिये वन में जा रहे हैं । तब शिवकुमार ने मुनि के पास जाकर अपना पूर्व-भव सुन संसार से विरक्त हो दीक्षा ले ली और दृढ़कर नामक श्रावक के घर प्रासुक आहार लिया । उसके बाद स्त्रियों के निकट असिधारव्रत परम ब्रह्मचर्य पालते हुए बारह वर्ष तक तप कर अन्त में संन्यास-मरण करके ब्रह्म-कल्पमें विद्युन्माली देव हुआ । वहाँ से चयकर जम्बूकुमार हुआ सो दीक्षा ले केवलज्ञान प्राप्त कर मोक्ष गया । इसप्रकार शिवकुमार भाव-मुनि ने मोक्ष प्राप्त किया । इसकी विस्तार सहित कथा जम्बूचरित्र में हैं, वहाँ से जानिये । इसप्रकार भाव-लिंग प्रधान है ॥५१॥ |