
जचंदछाबडा :
भावलिंगियों में जो दर्शन-ज्ञान-चारित्र से शुद्ध हैं उनके प्रति आचार्य को भक्ति उत्पन्न हुई है, इसलिये उनको धन्य कहकर नमस्कार किया है वह युक्त है, जिनके मोक्ष-मार्ग में अनुराग है, उनमें मोक्ष-मार्ग की प्रवृत्ति में प्रधानता दिखती है, उनको नमस्कार करे ॥१२९॥ |