
जचंदछाबडा :
जिन मनुष्योंने जीव--अजीव पदार्थका स्वरूप यथार्थ नहीं जाना उनके देहमें स्वपराध्यवसाय है । अपनी देहको अपनी आत्मा जानते हैं और परकी देहको परकी आत्मा जानते हैं, उनके पुत्र स्त्री आदि कुटुम्बियोंमें मोह (ममत्व) होता है । जब वे जीव--अजीव के स्वरूप को जानें तब देह को अजीव मानें, आत्मा को अमूर्तिक चैतन्य जानें, अपनी आत्मा को अपनी मानें, और पर की आत्मा को पर जानें, तब पर में ममत्व नहीं होता है । इसलिये जीवादिक पदार्थों का स्वरूप अच्छी तरह जानकर मोह नहीं करना यह बतलाया है ॥१०॥ |