
जचंदछाबडा :
यह भी कर्म के नाश करने के कारण का संक्षेप कथन है । जो अपने स्वरूप की श्रद्धा, रुचि, प्रतीति, आचरण से युक्त है वह नियम से सम्यग्दृष्टि है, इस सम्यक्त्व-भाव से परिणमन करता हुआ मुनि आठ कर्मों का नाश करके निर्वाण को प्राप्त करता है ॥१४॥ |