
जचंदछाबडा :
कायक्लेशादिक तप तो सब ही मत के धारक करते हैं, वे तपस्वी मंद-कषाय के निमित्त से सब ही स्वर्ग को प्राप्त करते हैं, परन्तु जो ध्यान के द्वारा स्वर्ग प्राप्त करते हैं वे जिन-मार्ग में कहे हुए ध्यान के योग से परलोक में, जिसमें शाश्वत सुख है ऐसे, निर्वाण को प्राप्त करते हैं ॥२३॥ |